हरियाणवी लोक संगीत की खूबसूरती यही है कि वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। अंजू द्वारा गाई गई यह रागनी इस बात का प्रमाण है कि अच्छे शब्द और सुरीली आवाज कभी पुरानी नहीं होती। अगर आप भी लोक संगीत के शौकीन हैं, तो यह प्रस्तुति आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी।
बिना किसी ताम-झाम के, उनकी सादगी भरी गायकी दर्शकों को सीधे लोक कला से जोड़ती है।
"के सपना तेरा जिक्र करूँ" केवल एक गाना नहीं है, यह यादों का एक झरोखा है। इसकी पंक्तियाँ श्रोताओं को पुराने समय और अपनेपन की याद दिलाती हैं। आज के शोर-शराबे वाले संगीत के बीच, अंजू की आवाज में यह रागनी सुकून देने वाली है। निष्कर्ष
अंजू जैसी उभरती कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के जरिए हरियाणवी संस्कृति को आज की पीढ़ी तक पहुँचा रही हैं। क्यों खास है यह गाना?
अंजू की आवाज में वह दर्द और गहराई महसूस होती है जो मेहर सिंह की कविताओं की आत्मा है।
अंजू की मधुर आवाज में जादू
के सपना तेरा जिक्र करूँ: हरियाणवी रागनी की एक भावुक यात्रा